Israel-Iran Conflict: क्या रूस भी उतरेगा मैदान में? ईरानी विदेश मंत्री की पुतिन से मुलाकात पर दुनिया की नजर

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ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब अमेरिका की सैन्य एंट्री से हालात और भी गंभीर हो गए हैं।

नई दिल्ली,पंचखबर डेस्क। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब अमेरिका की सैन्य एंट्री से हालात और भी गंभीर हो गए हैं। इसी कड़ी में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के लिए रविवार को मॉस्को रवाना हो गए हैं। इस मुलाकात को लेकर दुनिया भर में अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या अब इस संघर्ष में रूस भी खुलकर शामिल होगा?

अमेरिका के हमले के बाद ईरान-रूस समीकरण तेज

कुछ ही घंटों पहले अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हमले किए, जिससे ईरान-इजरायल टकराव और भी भड़क गया है। अमेरिका की इस कार्रवाई को सीधी सैन्य एंट्री माना जा रहा है। अब ईरानी विदेश मंत्री अराघची पुतिन से ‘गंभीर परामर्श’ के लिए मॉस्को पहुंचे हैं।

अराघची बोले – रूस हमारा मित्र, करेंगे गंभीर बातचीत

OIC सम्मेलन के दौरान इस्तांबुल में अराघची ने प्रेस से बात करते हुए कहा, “रूस हमारा करीबी मित्र है, हम एक-दूसरे से सलाह लेते हैं। मैं पुतिन से गंभीर रणनीतिक चर्चा करूंगा। इस मुलाकात को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि ईरान अब अमेरिका के खिलाफ सैन्य या राजनीतिक रणनीति में रूस का समर्थन चाह रहा है। रूस पहले ही इजरायल की हालिया कार्रवाइयों पर नाराजगी जता चुका है। पुतिन और ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के रिश्ते अच्छे माने जाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोधी माने जाने वाले पुतिन का रवैया इस बार कूटनीतिक मोर्चे को और कठिन बना सकता है।

अराघची का बड़ा बयान – “अब कूटनीति का समय नहीं”

अमेरिका की कार्रवाई के बाद अराघची ने कहा, “अब हालात कूटनीति के नहीं रहे। बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए, लेकिन इस वक्त ऐसा कोई विकल्प नहीं है। ईरान अब इस हमले को सीधा युद्धात्मक हमला मान रहा है और इसी वजह से तनाव और बढ़ता जा रहा है।

क्या होगा रूस का अगला कदम?

रूस और ईरान की यह मीटिंग इस पूरे क्षेत्रीय संघर्ष का टर्निंग पॉइंट बन सकती है। अगर रूस खुलकर ईरान का साथ देता है, तो इससे पश्चिम एशिया में सीधा महाशक्ति टकराव हो सकता है अमेरिका और इजरायल एक ओर ईरान और रूस दूसरी ओर पश्चिम एशिया में शुरू हुआ यह टकराव अब महाशक्तियों के मोर्चे में बदलता नजर आ रहा है। रूस की भूमिका पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं – क्या वो सिर्फ समर्थन देगा, या खुले मैदान में उतरेगा?

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