Bihar Chunav: चुनावी साल में ताजा हुई पुरानी यादें: जब नीतीश कुमार ने टेबल पर मुक्का मारकर कहा था,”एक दिन मैं मुख्यमंत्री बनूंगा! जानिए क्या है ये किस्सा?

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Nitish Kumar

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बिहार में चुनावी हलचल तेज है और इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा एक पुराना किस्सा चर्चा में है।

Bihar Chunav 2025: बिहार में चुनावी हलचल तेज है और इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा एक पुराना संस्मरण चर्चा में है। यह किस्सा बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और पद्मश्री से सम्मानित सुरेंद्र किशोर ने साझा किया है।

1977 का किस्सा, जब नीतीश ने जताया था आत्मविश्वास

सुरेंद्र किशोर बताते हैं कि यह घटना 1977 की है, जब पटना के डाक बंगला चौराहा स्थित एक चर्चित कॉफी हाउस में उनकी नीतीश कुमार से लंबी बातचीत हो रही थी। उस समय नीतीश कुमार विधानसभा चुनाव हार चुके थे। बातचीत के दौरान जब कर्पूरी ठाकुर की कार्यशैली पर चर्चा चली, तो नीतीश कुमार ने टेबल पर मुक्का मारते हुए कहा,“सुरेंद्र जी, मैं एक दिन मुख्यमंत्री जरूर बनूंगा और मुख्यमंत्री बनकर अच्छा काम करूंगा।

पत्रकार को लगा बड़बोलापन, लेकिन सपना हुआ सच

सुरेंद्र किशोर लिखते हैं कि उस समय उन्हें यह सुनकर हैरानी हुई। उन्हें लगा कि यह महज बड़बोलापन है। लेकिन वक्त ने साबित किया कि नीतीश कुमार का आत्मविश्वास सही था और उन्होंने बाद में बिहार की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया।पत्रकार को लगा बड़बोलापन, लेकिन सपना हुआ सच सुरेंद्र किशोर लिखते हैं कि उस समय उन्हें यह सुनकर हैरानी हुई। उन्हें लगा कि यह महज बड़बोलापन है। लेकिन वक्त ने साबित किया कि नीतीश कुमार का आत्मविश्वास सही था और उन्होंने बाद में बिहार की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया।

डॉ. लोहिया से प्रभावित, जनता से गहरा जुड़ाव

छात्र जीवन से ही नीतीश कुमार का झुकाव डॉ. राममनोहर लोहिया की विचारधारा की ओर रहा। बाद के वर्षों में भी सुरेंद्र किशोर और नीतीश कुमार का संबंध बना रहा। जब नीतीश मुख्यमंत्री बने तो सुरेंद्र किशोर ने अपने लेखों और रिपोर्टों में उनके अच्छे कामों की चर्चा की। सुरेंद्र किशोर बताते हैं कि नीतीश कुमार मजाक में कहा करते थे, दरअसल, किशोर का मानना था कि बिहार को लंबे समय बाद नीतीश कुमार जैसे काम करने वाले मुख्यमंत्री मिले थे। ऐसे में उनका मनोबल बढ़ाना और उन्हें समर्थन देना जनता और बिहार के हित में था। पत्रकार ने लिखा है कि उन्होंने नीतीश कुमार का समर्थन इसलिए भी किया क्योंकि वह खुद जंगल राज के भुक्तभोगी रह चुके थे। उनका मानना था कि नीतीश कुमार के अच्छे कामों से बिहार को एक नई दिशा मिली और उस दौर की वापसी रोकी जा सकी। यह संस्मरण बताता है कि नीतीश कुमार ने शुरुआती दौर से ही बड़े विज़न और आत्मविश्वास के साथ राजनीति की राह चुनी थी। उनका वह जज़्बा ही था जिसने उन्हें एक दिन सचमुच बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया।

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